फतेहपुर सदर सीट: 32 साल से वापसी को तरस रही कांग्रेस, जनता को BJP आ रही रास

Published on : 11:05 PM Sep 28, 2021

फतेहपुर की सदर सीट (fatehpur sadar assembly) जिले की मुख्य सीट मानी जाती है. माना जाता है इस सीट पर मुस्लिम और लोधी मतदाताओं का वर्चस्व है. लिहाजा, इन दो तबकों का वोट जिस उम्मीदवार के खाते में जाता है, उसकी विजय निश्चित है. इस सीट पर 1989 तक कांग्रेस पार्टी का दबदबा रहा. फिलहाल, यहां से भाजपा से सिटिंग विधायक विक्रम सिंह (bjp mla vikram singh) हैं. आइये जानते हैं इस सीट का क्या है समीकरण...

फतेहपुर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Election 2022) के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है. सूबे में अलग-अलग जातियों को साधने के लिए समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) हर संभव कोशिश में जुटी हैं. सभी राजनीतिक पार्टियां जीत के समीकरण और चुनावी रणनीति तैयार कर रही हैं. सभी की निगाहें जातीय वोट बैंक पर टिकी हैं. सपा और बीजेपी अति पिछड़ी जातियों में शामिल अलग-अलग जातियों को साधने के लिए उसी समाज के नेता को मोर्चे पर भी लगा दिया है. वहीं, चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले नेता मतदाताओं के बीच अभी से उन्हें रिझाने में लगे हुए हैं. अगर, फतेहपुर जिले की बात की जाए तो यहां 6 विधानसभा सीटे हैं. पंचायत चुनाव के दौरान निर्वाचन कार्यालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, जिले में मतदाताओं की संख्या 18 लाख 52 हजार 515 है. अगर, जातीय आंकड़ों की बात की जाए तो जनपद में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 20 फीसदी और दलित मतदाता लगभग 30 फीसदी हैं. इसके अलावा 10 फीसदी कुर्मी, 10 फीसदी ब्राम्हण, 8 फीसदी क्षत्रिय, 12 फीसदी लोधी और 10 फीसदी अन्य मतदाता हैं. आज हम बात फतेहपुर सदर विधानसभा की करेंगे. यहां लोधी और मुस्लिम वोट जिस करवट बैठते हैं, उसी का पलड़ा भारी होता रहा है. यह सीट जिले की मुख्य सीट मानी जाती है. इस सीट पर 1989 तक कांग्रेस पार्टी का दबदबा रहा, लेकिन उसके बाद कांग्रेस वापसी को तरस गई. उसके बाद जनता दल, बसपा, सपा और सबसे ज्यादा बार बीजेपी के खाते में सीट गई. वर्तमान में भाजपा से सिटिंग विधायक विक्रम सिंह हैं. आइये जानते हैं इस सीट का समीकरण क्या कहता है...

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फतेहपुर जिले की 6 विधानसभा सीटें

क्र0सं0. विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र संख्या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का नाम
1. 238 जहानाबाद
2. 239 बिन्दकी
3. 240 फतेहपुर
4. 241 आयहशाह
5. 242 हुसैनगंज
6. 243 खागा

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गंगा और यमुना नदी के बीच बसे फतेहपुर जिले की सदर विधानसभा सीट पर कभी कांग्रेस पार्टी का वर्चस्व हुआ करता था. साल 1989 तक इस सीट पर कांग्रेस का राज रहा, लेकिन इसके बाद हाथ यहां जनता ने अपना रुख बदल लिया. लंबे समय तक कांग्रेस का राज रहने के बावजूद विधानसभा क्षेत्रवासियों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा. अभी भी उच्च मेडिकल फैसिलिटी और उच्च शिक्षा के लिए लोगों को पड़ोसी जिला कानपुर पर निर्भर रहना पड़ रहा है. स्वास्थ्य के लिहाज से यह क्षेत्र काफी पिछड़ा रहा है. किसी गंभीर बीमारी या किसी हादसे की स्थिति में अब भी मरीजों को उपचार के लिए कानपुर या लखनऊ रेफर करना पड़ता है. यह क्षेत्र नेशनल हाईवे दो और हावड़ा-दिल्ली रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है. यहां बस और ट्रेन की अच्छी कनेक्टिविटी है. फतेहपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में हर जाति-वर्ग के लोग निवास करते हैं.

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साल 2017 के विधानसभा चुनाव में फतेहपुर सदर विधानसभा सीट से 14 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच सीधा मुकाबला था. हालांकि, बीजेपी के उम्मीदवार विक्रम सिंह (उपचुनाव में निर्वाचित विधायक) 89481 वोट पाकर फतेहपुर सदर विधानसभा सीट से विजयी हुए थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के चंद्र प्रकाश लोधी 57983 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे. बसपा के समीर त्रिवेदी को 35548 वोट मिले. वे तीसरे स्थान पर रहे. कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे राजकुमार लोधी को मात्र 909 वोट मिले. साल 2017 के चुनाव में फतेहपुर सदर विधानसभा सीट पर कुल 3 लाख 26 हजार 564 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था. इनमें तीन हजार से अधिक ऐसे मतदाता भी थे, जिन्होंने पहली बार मतदान किया.

1989 के बाद का इतिहास


साल 1989 के बाद दो बार इस सीट से जनता दल के उम्मीदवार विधानसभा पहुंचे. साल 1993 में पहली बार इस सीट पर पहली बार कमल खिला और बीजेपी के टिकट पर राधेश्याम गुप्ता जीतकर विधायक बने. राधेश्याम गुप्ता 1996 में भी जीते और प्रदेश सरकार में न्याय विभाग के मंत्री बनाए गए. 2002 में यह सीट बसपा के खाते में चली गई. 2007 में कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पौत्र विभाकर शास्त्री को फतेहपुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन बीजेपी के उम्मीदवार से उन्हें मात खानी पड़ी. साल 2012 में सपा ने जीत हासिल की, लेकिन बीमारी के कारण विधायक सैय्यद कासिम हसन के असमय निधन के बाद साल 2014 में हुए उपचुनाव में बीजेपी के विक्रम सिंह विजयी और फिर 2017 में विक्रम सिंह ने जीत दर्ज कर कब्जा बरकरार रखा.

कासिम हसन का सफर
दिवंगत विधायक कासिम हसन पहली बार 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर जहानाबाद से विधायक बने. जब पूरे देश में वीपी सिंह का जादू चला तो कासिम फतेहपुर सदर सीट से 1989 में विधायक चुने गए. इसके बाद फिर बसपा प्रत्याशी के रूप में जहानाबाद से 1996 में चुनाव लड़े और विधायक बने. वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर फतेहपुर सदर सीट से विधायक बने. हालांकि, बीमारी के कारण विधायक सैय्यद कासिम हसन का साल 2014 में असमय निधन हो गया, जिसके बाद वहां उपचुनाव हुए तो सीट बीजेपी के खाते में चली गई. कहा जाता है कासिम हसन एक मंझे हुए सियासी खिलाड़ी थे. हवा का रुख देखकर वह दल बदलते थे और कुर्सी भी हासिल करते रहे. जनता पार्टी से राजनीति शुरू करने वाले श्री हसन ने जनता दल, बहुजन समाज पार्टी व समाजवादी पार्टी का दामन थामा और इन चारों दलों के झंडे को पकड़कर चार बार विधानसभा पहुंचे.

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फतेहपुर सदर विधानसभा सीट पर 2017 के चुनाव में 3 लाख 26 हजार 564 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था. जातीय समीकरण की बात करें तो इस सीट पर सबसे ज्यादा ओबीसी वर्ग के मतदाता जैसे कि लोधी, मौर्य हैं. मुस्लिम मतदाता भी अच्छी तादाद में हैं. क्षत्रिय, ब्राह्मण मतदाता भी फतेहपुर सदर सीट पर निर्णायक स्थिति में हैं.

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फतेहपुर सदर विधानसभा सीट से वर्तमान विधायक विक्रम सिंह का जन्म 20 मई 1967 को आगरा में हुआ था. उनके पिता आरके सेंगर एक डिफेंस ऑफिसर थे. विक्रम सिंह की शुरुआती पढ़ाई अम्बाला के केंद्रीय विद्यालय में हुई और पिता की सर्विस के दौरान उनके ट्रांसफर के साथ विक्रम सिंह के स्कूल भी बदलते रहे. इंटर तक की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से करने के बाद वे ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए प्रयागराज चले गए, जहां उन्होंने इविंग क्रिश्चियन कॉलेज में दाखिला लिया और वहीं से छात्र राजनीति के जरिए सियासी सफर की शुरुआत की. विक्रम सिंह साल 1987 में अध्यक्ष चुने गए

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छात्र राजनीत के दौरान ही उनका परिचय प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा से हुई. विक्रम सिंह ने उनके साथ काफी समय गुजारा फिर 1991 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के साथ हो लिए. वीपी सिंह के साथ भी लंबा समय गुजारने के बाद विक्रम सिंह की मुलाकात बीजेपी के वरिष्ठ नेता चंद्रा स्वामी से हुई. साल 2010 में विक्रम सिंह, नितिन गडकरी की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हुए और 2014 के उपचुनाव में पहली बार फतेहपुर सदर विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए.

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