बाराबंकी की हैदरगढ़ विधानसभा: मुख्यमंत्री रहते हुए राजनाथ सिंह ने यहां से लड़ा था उपचुनाव

Published on : 11:06 PM Sep 28, 2021

आजादी के बाद वर्ष 1951 में हुए पहले आम चुनाव में सूबे में 347 विधानसभा सीट हुआ करती थीं. तब बाराबंकी और आसपास के क्षेत्रों को मिलाकर जिले में 9 सीटें हुआ करती थीं. मलिहाबाद और बाराबंकी के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र को मिलाकर बनी विधानसभा में दो सीटें- फतेहपुर उत्तर विधानसभा में एक सीट, फतेहपुर दक्षिण विधानसभा में एक सीट,नवाबगंज उत्तर में एक सीट, नवाबगंज दक्षिण-हैदरगढ़-रामसनेहीघाट को मिलाकर बनी विधानसभा में दो सीट और रामसनेहीघाट विधानसभा में दो सीटें हुआ करती थीं. वर्ष 1951 में हुए चुनाव में हैदरगढ़ की दोनों सीटों पर कांग्रेस जीती थी. जिसमे घनश्याम दास और उमाशंकर मिश्रा विजयी हुए थे.

बाराबंकी: राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले की 6 विधानसभाओं में एक है हैदरगढ़ विधानसभा 272. जिले की ये दूसरी सुरक्षित विधानसभा है. लखनऊ-रायबरेली और अमेठी सीमाओं को छूती ये विधानसभा बहुत ही खास है. जिले की ये ऐसी महत्वपूर्ण विधानसभा है जिस पर मुख्यमंत्री रहते हुए राजनाथ सिंह ने उपचुनाव लड़ा था.यही वह विधानसभा है जिसे पहली बार वर्ष 1989 में जीतकर जिले में भाजपा ने अपना खाता खोला था.इसी विधानसभा से सपा के दिग्गज नेता अरविंद सिंह गोप ने वर्ष 2002 में चुनाव लड़कर अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की तो यहां से बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे आरके चौधरी भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं.

272-हैदरगढ़ सुरक्षित विधानसभा का इतिहास
लखनऊ-बनारस हाइवे पर स्थित हैदरगढ़ विधानसभा जिले की ऐसी विधानसभा है जो वर्ष 1951 से चली आ रही है. नए परिसीमन के बाद भी आज तक इसका नाम नही बदला, हां साल 2012 में ये सीट सुरक्षित जरूर हो गई.अब तक इस विधानसभा से 5 बार कांग्रेस,5 बार बीजेपी और 3 बार सपा को जीत मिली है. हैदरगढ़ नगर पंचायत और तहसील भी है. हैदरगढ़ रेल और सड़क नेटवर्क से जुड़ा है. यहां हिंदी,उर्दू और अवधी बोली जाती है. इस विधानसभा में सुबेहा और हैदरगढ़ नगर पंचायतें शामिल हैं. यहां अवसानेश्वर महादेव का प्रसिद्ध मंदिर है. इंडस्ट्री के नाम पर हैदरगढ़ के पोखरा में एक चीनी मिल है. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, हैदरगढ़ नगर पंचायत की आबादी 17,200 और सुबेहा नगर पंचायत की आबादी 13,772 है. इस विधानसभा के बीच से होकर गोमती नदी गुजरती है. मुख्य रूप से यहां के लोग खेती का काम करते हैं, वही तमाम लोग व्यापार और मेहनत-मजदूरी कर अपनी जीविका चलाते हैं.

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बाराबंकी की हैदरगढ़ विधानसभा
अनुमानित जातिगत आंकड़े
जातिगत आंकड़ों की बात करें तो इस विधानसभा में ब्राह्मण 20 फीसदी, क्षत्रिय 14 फीसदी, यादव 9 फीसदी, कुर्मी 9 फीसदी, दलित 14 फीसदी, मुस्लिम 20 फीसदी और अन्य जातियां 14 फीसदी हैं.
हैदरगढ़ विधानसभा 272 के आंकड़े.
पहले दो प्रतिनिधि चुने जाते थे
आजादी के बाद वर्ष 1951 में हुए पहले आम चुनाव में सूबे में 347 विधानसभा सीट हुआ करती थीं. तब बाराबंकी और आसपास के क्षेत्रों को मिलाकर जिले में 9 सीटें हुआ करती थीं. मलिहाबाद और बाराबंकी के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र को मिलाकर बनी विधानसभा में दो सीटें- फतेहपुर उत्तर विधानसभा में एक सीट, फतेहपुर दक्षिण विधानसभा में एक सीट,न वाबगंज उत्तर में एक सीट, नवाबगंज दक्षिण-हैदरगढ़-रामसनेहीघाट को मिलाकर बनी विधानसभा में दो सीट और रामसनेहीघाट विधानसभा में दो सीटें हुआ करती थीं. वर्ष 1951 में हुए चुनाव में हैदरगढ़ की दोनों सीटों पर कांग्रेस जीती थी. जिसमे घनश्याम दास और उमाशंकर मिश्रा विजयी हुए थे.
हैदरगढ़.
वर्ष 1951 के बाद जिले में विधानसभाओं की स्थिति
वर्ष 1951 के बाद हुए परिसीमन के बाद जिले में बाराबंकी,प्रतापगंज और हैदरगढ़ तीन विधानसभाएं बनी. जिनमें हर विधानसभा से दो-दो विधायक चुने जाने थे. वर्ष 1957 में हुए दूसरे चुनाव में हैदरगढ़ विधानसभा से निर्दल प्रत्याशी के तौर पर बजरंग बिहारी लाल और जंगबहादुर विधायक बने. इस चुनाव में कांग्रेस दोनों सीटें बुरी तरह हार गई. वर्ष 1957 के बाद फिर हुए परिसीमन के बाद जिले में हैदरगढ़, सिद्धौर,दरियाबाद,सतरिख,नवाबगंज और कुर्सी कुल 06 विधानसभाएं अस्तित्व में आई और सभी विधानसभाओं में एक-एक प्रतिनिधि चुना जाने लगा.
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चुनाव परिणाम
  • 1962 रामकिशोर निर्दल विनर
    जंगबहादुर सोशलिस्ट पार्टी रनर
  • 1967 जंगबहादुर सोशलिस्ट पार्टी विनर
    हामिदा हबीबुल्लाह कांग्रेस रनर
  • 1969 हामिदा हबीबुल्लाह कांग्रेस विनर
    रामकिशोर त्रिपाठी निर्दल रनर
  • 1974 जंगबहादुर भारतीय क्रांति दल विनर
    हामिदा हबीबुल्लाह कांग्रेस रनर
  • 1977 सुंदरलाल निर्दल विनर
    जंगबहादुर जनता पार्टी रनर
  • 1980 श्यामलाल बाजपेई कांग्रेस आई विनर
    सुंदरलाल भाजपा रनर
  • 1985 सुरेन्द्रनाथ अवस्थी कांग्रेस विनर
    सुंदरलाल भाजपा रनर
  • 1989 सुंदरलाल भाजपा विनर
    सुरेन्द्रनाथ कांग्रेस रनर
  • 1991 सुरेन्द्रनाथ कांग्रेस विनर
    सुंदरलाल भाजपा रनर
  • 1993 सुंदरलाल दीक्षित भाजपा विनर
    रामस्वरूप सिंह सपा रनर
  • 1996 सुरेन्द्रनाथ कांग्रेस विनर
    प्रदीप कुमार यादव सपा रनर

मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने लड़ा उपचुनाव
28 अक्टूबर 2000 को राजनाथ सिंह सूबे के मुख्यमंत्री बने, लेकिन वो प्रदेश के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे. लिहाजा उनके लिए सीट तलाश की जाने लगी. ऐसे में उस वक्त हैदरगढ़ की राजनीति के चमकते कांग्रेस के सितारे सुरेन्द्रनाथ अवस्थी आगे आये. उन्होंने एक मुख्यमंत्री को अपने जिले से चुनाव लड़ना सौभाग्य मानते हुए अपनी सीट राजनाथ सिंह के लिए छोड़ दी. उन्हें जिले और क्षेत्र के विकास की उम्मीद जगी, लिहाजा सुरेन्द्रनाथ अवस्थी ने त्यागपत्र दे दिया. इसके बाद अप्रैल 2001 में हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री रहते हुए राजनाथ सिंह ने यहां से चुनाव लड़ा. इस उपचुनाव में 20 प्रत्याशी मैदान में थे. राजनाथ सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी के रामपाल वर्मा को 40,364 वोटों से हरा कर यह सीट जीत ली. इस चुनाव में बसपा तीसरे और कांग्रेस पांचवे स्थान पर रही थी.

राजनाथ सिंह.
फिर जीते राजनाथ
वर्ष 2002 में हुए आम चुनाव में राजनाथ सिंह ने फिर इसी सीट से चुनाव लड़ा और सपा उम्मीदवार अरविंद सिंह गोप को 25,636 वोटों से शिकस्त दी.इस बार भी बसपा तीसरे और कांग्रेस पांचवे स्थान पर रही.राजनाथ सिंह चुनाव लड़कर विधानमंडल के नेता बने.नवम्बर 2002 में राजनाथ राज्यसभा सांसद निर्वाचित हुए तो उन्होंने हैदरगढ़ सीट से विधायकी से इस्तीफा दे दिया. उसके बाद हैदरगढ़ सीट खाली हो गई. फरवरी 2003 में यहां फिर उपचुनाव कराए गए जिसमे सपा के अरविंद सिंह गोप ने बसपा उम्मीदवार धर्मी रावत को हराकर इस सीट पर कब्जा कर लिया.उसके बाद वर्ष 2007 में एक बार फिर सपा ने इस सीट पर कब्जा कर लिया.
हैदरगढ़ विधानसभा 272 के आंकड़े.
वर्ष 2012 में सुरक्षित हुई विधानसभा
वर्ष 2012 में हैदरगढ़ विधानसभा सुरक्षित हो गई लिहाजा एक बार फिर प्रत्याशियों के समीकरण बदल गए. सामान्य वर्ग के प्रत्याशियों को चुनाव क्षेत्र बदलने पड़े. ऐसे में अरविंद सिंह गोप रामनगर विधानसभा तो सुंदरलाल दीक्षित दरियाबाद विधानसभा चले गए.
हैदरगढ़ विधानसभा 272 के आंकड़े.
भाजपा से बैजनाथ रावत वर्तमान विधायक
वर्तमान में यहां से भाजपा के बैजनाथ रावत विधायक हैं, जिन्होंने सपा के राममगन रावत को हरा कर ये सीट जीती थी. भूलभुलिया गांव के रहने वाले बैजनाथ रावत वर्ष 1991से 1993 तक और फिर वर्ष 1993 से 1995 तक सिद्धौर विधानसभा से दो बार विधायक रह चुके हैं. वर्ष 1992 में ये प्रदेश के ऊर्जा राज्यमंत्री भी रहे.वर्ष 1998 में ये बाराबंकी से सांसद भी रहे.वर्ष 2017 के चुनाव में इन्होंने पूर्व सांसद रामसागर के पुत्र राम मगन रावत को 33 हजार 520 वोटों से हराकर इस सीट पर भाजपा का कमल खिलाया था.बहरहाल भाजपा एक बार फिर बैजनाथ रावत पर दांव लगा सकती है लेकिन सपा से टिकट की दौड़ में कई प्रत्याशी हैं. बसपा और कांग्रेस की भी इस महत्वपूर्ण सीट पर नजर है लेकिन उसने अभी अपने पत्ते नही खोले हैं.


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