RBI Monetary Policy : बैंकों की नजर में नीति व्यावहारिक, अगस्त में रेपो रेट में वृद्धि संभावित

Published on : 04:55 PM Apr 10, 2022

देश के कई शीर्ष बैंकरों ने मुद्रास्फीति के दबाव के बावजूद रेपो रेट में बदलाव नहीं करने के रिजर्व बैंक के फैसले का समर्थन किया है. बैंकरों ने आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के फैसले को व्यावहारिक और समझदारी भरा निर्णय बताया है. हालांकि, इनका कहना है कि जीडीपी वृद्धि और मुद्रास्फीति के बारे में आरबीआई के पूर्वानुमानों के अधिक लगातार संशोधन जरूरी हैं.

नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर भारत के सबसे बड़े बैंक- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अध्यक्ष दिनेश खारा का कहना है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति की घोषणा मौजूदा अनिश्चित आर्थिक माहौल का व्यावहारिक आकलन है. खारा ने कहा कि आरबीआई ने विकास और मुद्रास्फीति का सही ढंग से आकलन किया है. उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ने सरकारी उधार कार्यक्रम (government borrowing program) का समर्थन करने के लिए भी कई उपायों की घोषणा की है, जो किसी भी तरह अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाले नहीं (non-disruptive) हैं.

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ईटीवी भारत के एक सवाल पर एसबीआई चीफ दिनेश खारा ने कहा, बैंकों में कार्ड-रहित निकासी में अंतर-संचालन (interoperability) की अनुमति देने के उपायों से क्यूआर कोड से होने वाले भुगतान को और प्रोत्साहन मिलेगा. उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान के लिए एक मजबूत संरचना स्थापित करने का निर्णय इस कदम का तार्किक परिणाम है. उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर आरबीआई की मौद्रिक नीति की घोषणा हमें कोरोना महामारी के बाद की दुनिया (world after COVID-19) के लिए तैयार करती है.

आरबीआई की मौद्रिक नीति पर येस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील पान (YES Bank Indranil Pan) का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों में 'टेक्टोनिक बदलाव' (tectonic shift) के बीच रिजर्व बैंक ने रेपो दर में संभावित वृद्धि के लिए बाजार को तैयार करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं. पान ने ईटीवी भारत को बताया, वैश्विक बाजार की मौजूदा स्थिति को स्पष्ट किया गया है, क्योंकि गवर्नर ने संकेत दिया था कि आरबीआई के लिए वरीयता का क्रम अब मुद्रास्फीति, विकास और वित्तीय स्थिरता है, न कि कोरोना काल के बाद विकास की गति को बनाए रखना और समर्थन करना. Advertisement

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येस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील पान

उन्होंने कहा कि तरलता के कारण मौद्रिक नीति न्यूट्रल बनी रहेगी इस बात के कयास लगने पहले ही शुरू हो चुके थे. बकौल अर्थशास्त्री इंद्रनील पान, रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति में स्थायी जमा सुविधा को प्रणालीबद्ध (institutionalization of the Standing Deposit Facility) करने के साथ परिचालन दर में 40 आधार अंकों (0.4 प्रतिशत) की वृद्धि की गई है. उन्होंने कहा कि आरबीआई ने एक उपकरण के रूप में रिवर्स रेपो को लगभग खत्म कर (buried the reverse repo as an instrument) दिया है. इंद्रनील पान ने उम्मीद जताई कि इस साल जून में आरबीआई का उदार रुख 'तटस्थ' दिखेगा और अगस्त में रेपो रेट में वृद्धि हो सकती है.

आरबीआई की मौद्रिक नीति पर बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध महानिदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अतनु कुमार दास (Atanu Kumar Das Bank of India) का कहना है कि टिकाऊ रिकवरी प्रक्रिया के दृष्टिकोण से मॉनेटरी पॉलिसी में 'फील गुड' का रुख (RBI monetary policy feel good) बना हुआ है. दास ने ईटीवी भारत को बताया, भारत और दुनिया में ऑपरेटिव वातावरण विकसित हो रहे हैं. ऐसे में पूर्वानुमानों (अनुमानित संख्या) को संशोधित किया जाना जरूरी है.

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आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के मुख्य अर्थशास्त्री प्रसेनजीत के बसु (ICICI Securities Prasenjit K Basu) का कहना है कि मौद्रिक नीति समिति ने समझदारी से मौद्रिक नीति को समायोजित रखने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति मामूली रूप से ऊपर होने के बावजूद आरबीआई ने संयम दिखाया है. ईटीवी भारत को भेजे गए एक बयान में बसु ने कहा, दो कारण रिजर्व बैंक की नीति को सही ठहराते हैं. पहला, बाहरी आपूर्ति झटकों के कारण मुद्रास्फीति आंशिक रूप से अधिक है, इसलिए मौद्रिक सख्ती के माध्यम से कुल मांग को कम करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. दूसरा, वित्त वर्ष 2021 में अर्थव्यवस्था में 6.6 फीसद का संकुचन देखा गया था. हालांकि, उत्पादन में काफी अंतर देखा गया था.

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बकौल प्रसेनजीत के बसु, वित्त वर्ष 2022 में 8.9% की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जो 7% सालाना की संभावित वृद्धि वाली अर्थव्यवस्था से बहुत दूर है. उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक नीति इसलिए उदार रुख (accommodative stance) बनाए रखना सही तरीका है. उन्होंने कहा कि घरेलू मांग में दोबारा तेजी आए (rebound in domestic demand) इसके लिए ऋण वृद्धि में तेजी लाने की जरूरत है, लेकिन अगर मुद्रास्फीति लक्ष्य से बहुत दूर हो जाती है, तो आरबीआई भी रणनीतिक रूप से फैसले लेगा.

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