जिस महिला ने गांव को बनाया रोल मॉडल, उसको गांव वालों ने नकारा

Published on : 04:36 PM May 19, 2021

अब इसे बदकिस्मती कहें या गांव वालों की सोच कि गांव में विकास के नए आयाम स्थापित कर अपने ग्राम पंचायत को 4 राष्ट्रीय और 8 राज्यस्तरीय पुरस्कार दिलाने वाली ग्राम प्रधान वर्तमान चुनाव हार गई.

बाराबंकीः इस महिला को ग्राम प्रधानी हारने का जरा भी गम नहीं है. उसे अफसोस इस बात का है कि गांव की महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त और स्वावलम्बी बनाने का उसने जो सपना देखा था उस पर विराम लग गया.

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गांव को रोल मॉडल बनाने वाली ग्राम प्रधान को मिली हार
मसौली विकास खण्ड की ग्राम पंचायत चंदवारा ने पिछले पांच वर्षों में बड़ा नाम कमाया. गांव को प्रदेश की आदर्श ग्राम पंचायत माना गया. तकरीबन 4465 लोगों की आबादी वाले चंदवारा गांव में 587 परिवार रहते हैं. वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में गांव की बागडोर प्रकाशिनी जायसवाल को मिली. गांव की इस बहू ने गांव के विकास का खाका खींचा तो लोग वाह-वाह कर उठे. गांव में प्रधान प्रकाशिनी ने गांव को ओडीएफ बना दिया. सड़कें, शौचालय और प्राथमिक स्कूल की तस्वीर बदल दी.

विकसित चंदवारा गांव.

गांव को बनाया हाईटेक
प्रकाशिनी ने पूरे गांव को सीसीटीवी कैमरे और वाई-फाई से लैस कर हाईटेक बना दिया. जगह-जगह कूड़ेदान, खेल का मैदान, पार्क, पोषण वाटिका, सामुदायिक शौचालय और मिनी सचिवालय ने गांव को सूबे की आदर्श ग्राम पंचायत बना दिया. प्रकाशिनी ने बालिका शिक्षा को बढ़ाने के लिए साइकिल बैंक स्थापित किया. बालिकाओं को साइकिलें दी, ताकि उन्हें गांव से बाहर पढ़ने जाने में कोई परेशानी न हो. गांव को रोल मॉडल माना गया, लिहाजा कई प्रान्तों के लोग यहां के विकास पर स्टडी करने आने लगे. Advertisement

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गांव को 4 राष्ट्रीय और 8 राज्यस्तरीय पुरुस्कार
ग्राम प्रधान प्रकाशिनी जायसवाल की मेहनत से वर्ष 2018 में गांव को पंडित दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरुस्कार से नवाजा गया. लगातार विकास के पायदान बढ़ते रहने से वर्ष 2019 और फिर वर्ष 2020 में दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरुस्कार हासिल कर गांव ने हैट्रिक बनाई. प्रकाशिनी की बदौलत गांव को इन पांच वर्षों में 4 राष्ट्रीय और 8 राज्य स्तरीय पुरस्कार हासिल हुए.

गांव को मिले पुरस्कार.

एक बार फिर गांव की सेवा करने की थी मंशा
इस बार के चुनाव में प्रकाशिनी ने अपने कराए गए कार्यों की बदौलत फिर उम्मीदवारी जताई. उन्हें पूरा भरोसा था कि गांव वाले उनका साथ देंगे. उन्होंने इस विकास को अंतिम नहीं माना था. प्रकाशिनी का इरादा था कि गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलम्बी बनाने के लिए वे कोई न कोई प्रोजेक्ट गांव में लाएंगी. गांव की बालिकाओं को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए पूरी कोशिश करेंगी. उन्हें गांव वालों पर भरोसा था कि वे उनका साथ जरूर देंगे, लेकिन रविवार को आये नतीजे ने उनकी मंशा पर पानी फेर दिया.

हार गईं चुनाव
रविवार को आये नतीजे में प्रकाशिनी जायसवाल को 759 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी रमेश चन्द्र जायसवाल उर्फ मुन्ना डॉक्टर को 1139 वोट मिले. इस तरह प्रकाशिनी जायसवाल 380 वोटों से हार गईं.

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'शायद गांव वालों को विकास पसंद नहीं'
अपनी हार पर प्रकाशिनी जायसवाल ने कहा कि शायद लोगों को उनका विकास कार्य पसंद नही आया. प्रकाशिनी ने कहा कि भले ही वह प्रधान नहीं बन पाईं, लेकिन गांव के विकास के साथ महिलाओं और बालिकाओं के विकास के लिए निरंतर काम करती रहेंगी.

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